श्रीमती ज्योति मूर्ति
उपाध्यक्षा तटरक्षिका
तटरक्षिका

 

 
सचमुच ! उपाध्यक्षा तटरक्षिका का पदभार ग्रहण करते हुए मैं अपने-आप को अत्यंत ही सौभाग्यशाली तथा सम्मानित महसूस कर रही हूँ ।
तटरक्षिका की स्थापना वर्ष से ही जुड़ी होने के कारण मैंने तटरक्षिका रूपी इस किशोरतरू को तटरक्षक बिरादरी को सहायता, सामर्थ्य एवं उसे सजीव बनाये रखने वाले विशाल वृक्ष के रूप में विकसित होते देखा है ।
तटरक्षिका सामाजिक ढांचे में हो रहे परिवर्तन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक नारी की तरह अपने को विकसित करने में विश्वास करती है । सदस्यों को आज की आधुनिक नारी के अनुरूप ढालने के लिए उनके कौशल विकास, कल्याण एवं पुनर्वास के प्रति हम प्रयासरत हैं ।
मैं मिलजुलकर काम करने में विश्वास करती हूँ और मुझे विश्वास है कि सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी द्वारा नई सोच, बंधुत्व की भावना तथा संगठन के विकास के लिए आवश्यक संबल प्राप्त होगा ।
आओ तटरक्षक बिरादरी की सुख-शांति व समृद्धि हेतु दल के रूप में आगे बढ़े ।
जय हिंद

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Last Updated On :

19/05/2017
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अंतिम नवीनीकृत: 21/09/2017

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