चिकित्सीय निकासी अभियान
समुद्र में पोत पर खतरनाक स्थिति से गुजर रहे रोगियों के चिकित्सीय निकासी के दायित्व का भी भारतीय तटरक्षक निर्वहन करता है । किसी प्रकार की आपदा स्थिति में भारतीय तटरक्षक पोत एवं वायुयान, रोगियों को चिकित्सीय सहायता प्रदान करके बाहर निकालते हैं एवं अस्पताल में भर्ती करते हैं ।
हाल ही में की गई चिकित्सीय/आकस्मिक​ निकासी सं​क्रिया

 

‘मात्स्यिकी नौका राजमाता’ द्वारका (गुजरात)

10 मार्च 16 को लगभग 1145 बजे द्वारका लाइट के दक्षिण-पश्चिम 48 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित ‘राजमाता’ मत्स्य नौका से रिमोट ऑपरेटिंग स्टेशन (आर आर एस) पोरबंदर को वी एच एफ पर सूचना प्राप्त हुई कि नाव में घरेलू स्टोव फट जाने के कारण एक कर्मी बुरी तरह से झुलस गया है ।

सूचना मिलने के बाद, तटरक्षक जिला मुख्यालय-1 ने भारतीय तटरक्षक पोत सी-413 को चिकित्सीय निकासी के लिए शीघ्र पहुँचने का आदेश जारी किया । भारतीय तटरक्षक पोत सी-413 मौके पर 1230 बजे पहुँची तथा मत्स्य नौका को चिन्हित किया । राजमाता नौका के घायल मछुवारा सहित 02 अन्य मछुवारों को भारतीय तटरक्षक पोत सी-413 में चढ़ाया गया । प्रारंभिक जांच से पता चला कि रोगी 60-70 प्रतिशत जला हुआ है, परंतु होश में है और चल सकता है ।

रोगी को लेकर भारतीय तटरक्षक पोत कनकाई जेट्टी पहुँची तथा आगे के चिकित्सी य उपचार के लिए रोगी को स्टेशन मेडिकल टीम को सौंप दिया गया । रोगी को टाटा केमिकल अस्पताल मीठापुर में भर्ती किया गया और बाद में इरविन अस्पताल जामनगर में स्थानांतरित कर दिया गया ।

करवार में एमएफबी ‘स्टार फिश’ की सहायता

05 अप्रैल 16 को लगभग 1745 बजे नियमित गश्त कर रही भारतीय तटरक्षक पोत सी-420 को एमएमबी चैनल-16 पर सूचना मिली कि करवार लाइट के उत्तर-पश्चिम 11.5 नॉटिकल मील की दूरी पर एमएफबी स्टार फिश में एक मछुआरा (मि. दामोदर, उम्र-55 वर्ष) पेट के भयानक दर्द से पीडित है, तथा चिकित्सीय निकासी की आवश्यकता है ।

सूचना प्राप्त होने पर, भारतीय तटरक्षक पोत सी-420 ने भारतीय तटरक्षक स्टेशन कारवार को सूचना प्रसारित किया । भारतीय तटरक्षक स्टेशन करवार ने भा.त.पो. सी-420 को आवश्यक सहायता प्रदान करने का कार्य सौंपा । 05 अप्रैल 16 को 1805 बजे भा.त.पो. सी-420 मौके पर पहुँची । तथा एक परिचारक के साथ रोगी को वहाँ से निकाला । भा.त.पो. सी-420 रोगी के साथ करवार बंदरगाह में 1840 बजे पहुँची तथा 05 अप्रैल 16 को 1910 बजे आगे की चिकित्सीय सहायता के लिए रोगी को सरकारी अस्पताल करवार के आई सी यू में भर्ती कर दिया गया । रोगी की स्थिति ठीक है ।

‘एम वी गोवा’ मुंबई

06 अप्रैल लगभग 1927 बजे एम वी गोवा के मास्टर से टेलीफोन द्वारा एम आर सी सी मुंबई को सूचना प्राप्त हुई कि पोत के चौथे इंजीनियर के हाथ और कान में चोट लग जाने के कारण काफी खून बह रहा है । पोत ने प्रांग्से लाइट के उत्तर-पश्चिम 22 नॉटिकल मील की दूरी पर लंगर डाल रखा था । मास्टर ने यह भी बताया कि इंजीनियर का सिर लिफ्ट में 3 घंटे तक फंसा रहा । पोत के मास्टर ने चिकित्सीिय निकासी के लिए अनुरोध किया ।

सूचना मिलने के बाद 06 अप्रैल 16 को 2015 बजे नियमित गश्त कर रही भारतीय तटरक्षक पोत अग्रिम को एम वी गोवा के तरफ मोड़ दिया गया भारतीय तटरक्षक पोत अग्रिम ने रोगी को वहां से निकालकर शिपिंग कॉरेपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा भाड़े में ली गई सिविल नाव अरवास को 07 अप्रैल 16 को 0240 बजे मिडिल ग्राऊंड, मुंबई में सौंप दिया । भाड़े में ली गई नौका रोगी के साथ सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुँची तत्पंश्चात् रोगी को 07 अप्रैल 16 को 0330 बजे शाह क्लीनिक मरीन लाइन्स, मुंबई में भर्ती कर दिया गया । रोगी की स्थिति ठीक है ।

‘एफ बी सावाधन’ तारापुर (महाराष्ट्र)

27 अप्रैल 16 को लगभग 1455 बजे मत्स्य विभाग उटान के श्री एस जी दफ्तरदार ने रिमोर्ट ऑपरेटिंग स्टेशन (आर ओ एस) मुंबई को टेलीफोन पर सूचना दी कि तारापुर लाइट के दक्षिण-पश्चिम 45 नॉटिकल मील की दूरी पर मत्स्य नौका ‘सावाधन’ में एक मछुवारा बेहोश हो गया है । गश्त कर रहे तटरक्षक डोर्नियर को भी एम एम बी चैनल 16 पर नौका के संकट में होने को सूचना मिली । जानकारी करने पर पता चला कि एक कर्मी सीने की चोट के कारण बेहोश हो गया है, उसे चिकित्सा सहायता की तुरंत आवश्यकता है । तटरक्षक डोर्नियर ने तुरंत इस संदेश को तटरक्षक संचार केंद्र मुंबई तथा भारतीय तटरक्षक पोत एस के चौहान को भेजा । तटरक्षक डोर्नियर ने मत्स्य नौका को भारतीय तटरक्षक पोत की तरफ मुड़ने का परामर्श दिया ।

सूचना प्राप्त होने पर, 27 अप्रैल 16 को 1540 बजे क्षेत्र में गश्त कर रही भारतीय तटरक्षक पोत एस के चौहान को रोगी की चिकित्सीय निकासी के लिए मत्स्य नौका सावधान की तरफ मोड़ दिया गया । भारतीय तटरक्षक पोत एस के चौहान मौके पर 1830 बजे पहुँची, पोत की बोर्डिंग पार्टी ने मत्स्य नौका सावधान में जाकर रोगी की स्थिति का जायजा लिया; रोगी बेहोश था उसका नाड़ी की गति बहुत धीमी थी । 27 अप्रैल 16 को लगभग 2000 बजे जिला मुख्यालय संख्या-2 के चिकित्सा अधिकारी ने वी एच एफ पर रोगी को चिकित्सीय परामर्श तथा 02 आईवी सहित प्राथमिक उपचार प्रदान किया । रोगी की नाड़ी गति में सुधार हुआ तथा उसे अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता महसूस की गई ।

27 अप्रैल 16 को लगभग 2230 बजे मत्स्य नौका सावाधन रोगी के साथ भयंदर मत्स्य बंदरगाह पहुँची । आगे के उपचार के लिए रोगी को मत्स्य एसोसिएशन द्वारा नानावती अस्पताल, मुंबई में भर्ती किया गया । रोगी की स्थिति अभी भी नाजुक है ।

'माले में गाधू से गन तक' '

    

24 मई 16 को लगभग 1510 बजे मालद्वीव्स नेशनल डिफेंस फोर्स एअर विंग ने तटरक्षक अत्याधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर (ए एल एच) सी जी-852 को गाधू (गाफू धालु एटाल) से गन (एड्डु एटाल) तक एक रोगी को वायु मार्ग द्वारा पहुँचाने का कार्य सौंपा । रोगी ने लगभग 40 मीटर की गहराई में 4 बार गोता लगाया था । चौथे गोते के बाद रोगी के गर्दन के बाई तरफ, कंधों में दर्द तथा, बायां हाथ सुन्न एवं बायें पैर में जलन महसूस हो रही थी । डॉक्टर ने संग्रीला रिसार्ट विलिंगिली गन में डिकंप्रेसन करने की सिफारिश की ।


सूचना मिलने पर 24 मई 16 को 1645 बजे तटरक्षक अत्याधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) सीजी-852 ने डॉक्टर व परिचारक के साथ रोगी को लेकर गाधु से गन एड्डु एटल पर उतरा । वायुयान उतरने के पश्चात् रोगी को उतार कर मालद्वीप नेशनल डिफेंस फोर्स प्राधिकारी को सौंप दिया, ताकि वे उसे आगे डिंकप्रेसन चैंबर ट्रीटमेंट के लिए संग्रीला रिसोर्ट विलिंगली में भर्ती कर सकें ।

'एम वी किंग फार्चून'

    

24 मई 16 को लगभग 1030 बजे लोकल एजेंट एडमिरल शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड से टेलीफोन / ई-मेल द्वारा एम आर सी सी मुंबई को एम वी फार्चून में चिकित्सीय आपदा के विषय में सूचना मिली । पोत कर्मी मि. लिव जू युआन को 20 मई 16 को डेक पर गिरने के कारण सिर में चोट आ गई तथा उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी । पोत, करवार के दक्षिण-पश्चिम में 18 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित थी । पोत का विवरण अधोलिखित है ।


(क) नाम - एम वी किंग फार्चून

(ख) कॉल साइन - J8B4437

(ग) एमएमएसआई नं - 376768000

(घ) आई एम ओ - 8503046

(च) फ्लैग - सेंट विन्सेंट

(छ) एलपीसी/एनपीसी - बिक(ईरान)/सिंगापुर

(ज) कारगो - आयरन ओर


सूचना प्राप्त होने पर, एमआरसीसी (मुंबई) ने पोत से संपर्क किया तथा मास्टर को परामर्श दिया कि चिकित्सीय निकासी के लिए न्यू मंगलौर के तरफ प्रस्थान करें । भारतीय तटरक्षक स्टेशन करवार ने उस क्षेत्र में तैनात भारतीय तटरक्षक पोत सी-420 को सहायता प्रदान करने का कार्य सौंपा । भारतीय तटरक्षक पोत सी-420 मौके पर 24 मई 16 को 1215 बजे पहुँची । पोत की जेमिनी नौका को लेकर बोर्डिंग पार्टी एम वी किंग फार्चून के पास पहुँची तथा 1300 बजे रोगी को सुरक्षित तरीके से पोत पर चढ़ा दिया । रोगी बेहोस था परंतु जहाज पर चढ़ाते समय नाड़ी चल रही थी ।


24 मई 16 को रोगी को लेकर भारतीय तटरक्षक पोत सी-420 करवार बंदरगाह पहुँची तथा 1345 बजे उसे एंबुलेंस में पहुँचा दिया गया । 24 मई 16 को 1350 बजे रोगी को मि. गितेश मैसर्स एडमिरल शिपिंग लिमिटेड को सिविल अस्पताल में आगे के उपचार के लिए सौंप दिया गया ।

'एमटी टॉर्म वेंचर'

    

08 मई 2016 को लगभग 1117 बजे रेडियो मेडिकल डेनमार्क से समुद्री बचाव समन्वय केंद्र मुंबई को सूचना मिली । कोच्ची से पूर्व 205 नॉटिकल मील की दूरी पर एमटी टॉर्म वेंचर पोत के चीफ इंजीनियर मिस्टर एडमुंड डेम मेडसन (63 वर्ष), राष्ट्रीयता-डेनमार्क के पेट में अल्सर के कारण भयानक दर्द हो रहा था । रेडियो मेडिकल डेनमार्क ने रोगी को अस्पताल पहुँचाने के लिए चिकित्सीय निकासी के लिए अनुरोध किया ।

सूचना मिलने के बाद एमआरसीसी, मुंबई, ने पोत से संपर्क किया तथा रोगी के स्थिति व मास्टर के इरादों की जानकारी किया । शुरू में एमआरसीसी मुंबई ने पोत को कोच्ची की तरफ ले जाकर रोगी को उतारने का अनुरोध किया, जहां स्थानीय एजेंट उपचार की व्यवस्था कर रहा था । परंतु रोगी की स्थिति गंभीर होने के कारण मास्टर ने उसका जीवन खतरे में होने की बात कही । फलस्वरूप पोत को अगाती द्वीप की तरफ मोड़ दिया गया । बाद में भारतीय तटरक्षक पोत ने सी-412 ने कवरत्ती से प्रस्थान किया तथा एक अनुरक्षक (उक्त पोत के भारतीय कर्मी) के साथ रोगी को निकाला । 08 मई 16 को 1715 बजे रोगी व उसके अनुरक्षक को पोत से उतारकर भाड़े में ली गई नौका पर चढ़ा दिया गया । तत्पश्चात् रोगी को अनुरक्षक के साथ राजीव गांधी अस्पताल अगाती में स्थानांतरित कर दिया गया ।

एमआरसीसी (मुंबई) ने लक्षद्वीप के प्रशासन से रोगी को शीघ्र स्थानांतरित करने के लिए एअर एम्बुरलेंस की व्यवस्था करने का अनुरोध किया । रोगी को डॉक्टर की निगरानी में राजीव अस्पलताल से कोच्ची तक पवन हंस हेलीकॉप्टर द्वारा 09 मई को 1525 बजे पहुँचाया गया ।

'माले में गाधू से गन तक'

 

'एम वी किंग फार्चून'

 

'एमटी टॉर्म वेंचर'

 

‘एफ बी सावाधन’ तारापुर (महाराष्ट्र)

 

‘एम वी गोवा’ मुंबई

 

करवार में एमएफबी ‘स्टार फिश’ की सहायता

 

‘मत्स्य नौका राजमाता’ द्वारका (गुजरात)


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Last Updated On :

23/09/2016
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अंतिम नवीनीकृत: 21/09/2017

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