महानिदेशक राजेन्द्र सिंह, पीटीएम, टीएम
महानिदेशक भारतीय तटरक्षक

 

महानिदेशक राजेन्‍द्र सिंह का जन्म उत्‍तराखण्‍ड में हुआ है और श्री सिंह ने स्‍कूली शिक्षा मंसूरी तथा स्‍नातक की शिक्षा देहरादून (उत्‍तराखण्‍ड) से प्राप्‍त की है ।
 

फ्लैग अफसर ने सन् 1980 में भारतीय तटरक्षक में उस समय कार्यभार ग्रहण किया जब इसकी स्‍थापना की प्रक्रिया चल रही थी । इस प्रकार ये भारतीय तटरक्षक के विकास की योजनाओं की रूपरेखा बनाने वाले अग्रणीय व्यक्तियों में से एक हैं । महानिदेशक राजेंद्र सिंह ने विभाग की प्रत्‍येक श्रेणी की पोतों, जिसमें अंतर्रोधी नौका, उपतटीय गश्‍ती पोत, तीव्रगश्‍ती पोत, अपतटीय गश्‍ती पोत, अत्‍याधुनिक अपतटीय गश्‍ती पोत सम्मिलित हैं, की कमान की है । अस्‍सी के दशक के प्रारंभ में भारतीय समुद्री क्षेत्र में जब तस्करी अपनी चरम सीमा पर थी तब राष्‍ट्रीय हित में बाधक अनेकों समुद्री आर्थिक अपराधियों को पकड़ने में इनकी सक्रिय एवं प्रमुख भूमिका रही है । इनके उत्‍कृष्‍ट प्रयासों के लिए 15 अगस्‍त 1990 को भारत के राष्‍ट्रपति ने इन्‍हें तटरक्षक पदक का सम्‍मान प्रदान किया ।
 

अपने विभागीय जीवन में फ्लैग अफसर ने यूनाईटेड स्‍टेट कोस्‍ट गार्ड से समुद्री खोज एवं बचाव (एम-एस ए आर) तथा समुद्री सुरक्षा में भी प्रशिक्षण प्राप्‍त किया है । इन्‍होंने लाल बहादुर शास्‍त्री अकादमी मंसूरी से महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय सुरक्षा पाठ्यक्रम पर भी प्रशिक्षण ग्रहण किया है । फ्लैग अफसर ने तटों एवं पोतों दोनों प्रकार की विभिन्‍न नियुक्तियों को संभाला भी है तथा तटरक्षक के सभी आयाम़ों जैसे कि संक्रिया, प्रशासन, मानव संसाधन तथा नीति एवं योजना को योग्य नेतृत्व दिया है । अत्‍याधुनिक अपतटीय गश्‍ती पोत संग्राम की कमान के दौरान, इनके नेतृत्व में सुदूर पूर्व जापान, फिलीपींस एवं वियतनाम के तटों पर पोत द्वारा सद्भावना मिशन से आपसी मित्रता को संबल मिला । इन प्रयासों से भारतीय तटरक्षक को अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ख्‍याति प्राप्‍त हुई है ।
 

पिछले 34 वर्षों से फ्लैग अफसर तटरक्षक को बहुद्देशीय संगठन बनाने की प्रक्रिया में कार्यरत हैं । तटरक्षक मुख्‍यालय में निदेशक (प्रशासन) एवं निदेशक (नीति एवं योजना) की पूर्व नियुक्तियों के दौरान ये संगठन के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने तथा इसके सुनियोजित प्रसार की आधारशिला रखने का माध्‍यम बने । इन्‍होंने कमांडर, तटरक्षक गोवा के क्षेत्र का भी उत्‍तरदायित्‍व संभाला ।
 

महानिरीक्षक के रूप में इन्‍होंने पूर्वी एवं पहले के अविभाजित पश्चिमी क्षेत्र दोनों की कमान को संभाला है; जो इस बात को दर्शाता है; कि इन्‍होंने संगठन की दो तिहाई बेड़ों एवं यूनिटों की कमान को संभाला है । क्षेत्रीय कमांडर के रूप में इनके द्वारा किये गये चुनौती एवं दायित्‍वपूर्ण कर्तव्‍यों के निर्वहन से अनेकों ऐतिहासिक एवं निर्णायक परिणाम प्राप्‍त हुए हैं । पूर्वी मोर्चे पर, पाक की खाड़ी में चरम पर चल रहे जातीय संघर्ष से निपटने में भारतीय तटरक्षक का अग्रणी प्रयास तथा पश्चिमी मोर्चे पर तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु सुरक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण, इसके उदाहरण हैं । प्रबंधन के अपने नायाब तरीकों एवं कुशल नेतृत्‍व से फ्लैग अफसर ने अपनी प्रतिभाओं को प्रदर्शित किया है । इनकी उपलब्धियों ने भारतीय तटरक्षक के समग्र कार्य क्षेत्र पर अमिट छाप छोड़ी है । इनकी उल्‍लेखनीय एवं सराहनीय सेवा के लिए 15 अगस्‍त 2007 को राष्‍ट्रपति तटरक्षक पदक से सम्‍मानित किया गया है ।
 

भारतीय तटरक्षक के अपर महानिदेशक के रुप में इन्‍होंने सतत बढ़ती हुई कर्तव्‍यों की सूची एवं परस्‍पर विरोधी आवश्‍यकताओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया तथा संगठन के त्‍वरित विकास को सुगम बनाते हुए उच्‍चस्‍तरीय संक्रियात्‍मक दक्षता को गति प्रदान की ।
 

महानिदेशक राजेन्‍द्र सिंह का विवाह श्रीमती उर्मिला सिंह से हुआ है तथा इनकी दो पुत्रियां हैं ।
 

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Last Updated On :

05/01/2017
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अंतिम नवीनीकृत: 21/09/2017

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