मत्स्य नौका “एम वी पौमी”की सहायता

समुद्री बचाव समन्वय केंद्र पोर्ट ब्लेयर को 20 अप्रैल 16 को 1200 बजे सूचना प्राप्त हुई कि मत्स्य नौका “एम वी पौमी” 07 कर्मियों सहित निर्जन द्वीप के दक्षिण पश्चिम में 03 नॉटिकल मील की दूरी पर इंजन बंद हो जाने के कारण अनियंत्रित ढंग से बह रही है । मत्स्य नौका मायाबंदर से मत्स्य शिकार के लिए 17 अप्रैल 16 को प्रस्थान की थी ।


सूचना प्राप्त होने पर भारतीय तटरक्षक पोत सी-146 को 12:30 बजे मायाबंदर से सहायता के लिए रवाना किया गया । भारतीय तटरक्षक पोत सी-416 ने निर्जन द्वीप के दक्षिण 02 नॉटिकल मील की दूरी पर मत्स्य नौका को चिन्हित किया । पोत के तकनीकी दल ने मत्स्य नौका में जाकर खराबी की मरम्मत करने की कोशिश की । लेकिन सफल न हुए । तत्पश्चात् भारतीय तटरक्षक पोत सी-416 ने मत्स्य नौका को मायाबंदर की तरफ खींचना शुरू किया । भारतीय तटरक्षक पोत सात लोगों के दल सहित मत्स्य नौका एम वी पौमई को लेकर 21 अप्रैल 16 की पूर्वान्ह मायाबंदर पहुँची तथा नौका को मत्स्य विभाग को सौंप दिया गया ।

मंडपम से दूर असमर्थ बल्लम “वेनिता”की सहायता

भारतीय तटरक्षक स्टेशन टूटीकोरिन को 19 अप्रैल 16, 1900 बजे असमर्थ बल्लम से सूचना प्राप्त हुई कि इंजन खराब होने के कारण 06 कर्मियों सहित नौका मंडपम लाइट के दक्षिण पश्चिम में 15.5 नॉटिकल मील की दूरी पर लंगर डाले हुई है । नौका का यह समुद्री अभियान 15 अप्रैल 16 को थेरेसपुरम (टूटीकोरिन) से प्रारंभ हुआ था तथा 18 अप्रैल 16 तक वापस आने की उम्मीद थी । p>

असमर्थ बल्लम “वेनिता”की मंडपम में सहायता

  

सूचना प्राप्त होने पर गश्त कर रही भारतीय तटरक्षक पोत अभिराज को 19 अप्रैल 16 को 1900 बजे सहायता के लिए रवाना किया गया । भारतीय तटरक्षक पोत अभिराज 20 अप्रैल 16 को 0750 बजे मौके पर पहुँच गई । पोत कर्मियों द्वारा इंजन मरम्मत करने के प्रयास असफल होने के बाद भारतीय तटरक्षक पोत अभिराज ने मत्स्य नौका बल्लम “वेनिता” को 06 कर्मियों के साथ टूटीकोरिन फेयरवे बुआय तक खींच कर लाई । 20 अप्रैल 16 को 1610 बजे 06 कर्मियों सहित बल्लम को मत्स्य विभाग को सौंप दिया गया ।

मत्स्य नौका “महेज”की रत्नागिरी में सहायता

21 मार्च 16 को लगभग 1130 बजे तटरक्षक डोर्नियर सीजी-764 को वीएचएफ के चैनल-16 पर रत्नागिरी लाइट के उत्तर-पश्चिम 26 नॉटिकल मील की स्थिति से संकट की सूचना प्राप्त हुई । सीजी-764 ने इस सूचना को INMARSAT के माध्यम से ऑप्स सेंटर भा.त.र. स्टेशन रत्नागिरी को पहुँचाया कि एक फाइबर बोट को श्रीगजना एवं चक्रवर्ती-6 नामक दो नौकाओं द्वारा खींचा जा रहा है । सूचना को समुद्री बचाव समन्वय केंद्र मुंबई को भेजा गया ।


सूचना प्राप्ति के बाद अधोलिखित कार्रवाई की गई ।

(क) भारतीय तटरक्षक पोत सी-402 को आवश्यक सहायता के लिए 21 मार्च 16 को 1300 बजे रवाना किया गया ।

(ख) क्षेत्र के नाविकों को सचेत करने के लिए इंटरनेशनल सेफ्टी नेट को एम आर सी सी मुंबई द्वारा सक्रिय किया गया ।

(ग) 21 मार्च 16 को सी-402, 1500 बजे मौके पर पहुँची । छानबीन करने पर पता चला कि 1500 किग्रा मछलियों से लदी मत्स्य नौका एम एफ बी “महेज” पानी भर जाने के कारण खराब हो गई है । संकट कालीन संदेश एम एफ बी दुर्गाअंबिका द्वारा प्रसारित किया गया ।

(घ) इंजन रूम की स्थिति का जायजा लेने के लिए सी-402 द्वारा जैमिनी को उतारा गया ।

(च) आईसीजीएस सी-402 की बोर्डिंग पार्टी ने पोत की पावर सप्लाई उपयोग करके पंप द्वारा भरे हुए पानी को बाहर निकाला ।

(छ) संकटग्रस्त नौका के सभी 07 कर्मियों को बाहर निकाल कर भा.त.र. पोत सी-402 में ले जाया गया ।

(ज) इंजन एवं एलटरनेटर की खराबी तथा पानी भरने से संकटग्रस्त नौका एम एफ बी “महेज” को पानी निकालने के पश्चात् रत्नागिरी की ओर खींचना शुरू किया गया ।

(झ) भारतीय तटरक्षक पोत सी-402, जीवित दल एवं संकटग्रस्त नौका के साथ भगवती पोत, रत्नागिरी सुरक्षित पहुँची तथा 21 मार्च 16 को 1815 बजे रत्नागिरी पुलिस को सौंप दी गई । भा.त.र. पोत राजश्री खराब इंजन के मरम्मत होने तक क्षेत्र में ठहरी । पोत के मुख्य इंजन को 1330 बजे चालू किया गया तथा पोत को सुरक्षित ठिकाने तक पहुँचाने हेतु 09 मार्च 16 को चिट्टागांग पहुँचाया गया ।

 

डूबती एम एस वी “सेलवामाथा”की सहायता

19 मार्च 16 को लगभग 0210 बजे तटरक्षक मुख्यालय को टेलीफोन पर ‘एमवी हफनिया एशिया’ से ‘एमएसवी सेलवामाथा’ के संबंध में सूचना मिली । मास्टर ने सूचित किया कि बेपूर लाइट के पश्चिम 70 नाटिकल मील की दूरी पर एमएसवी संकटग्रस्त है तथा डूब रही है ।


डूबती एमएसवी सेलवामाथा की सहायता

  

एमआरसीसी मुंबई को सूचना प्रसारित की गई । त्वरित कार्रवाई करते हुए एमवी हफनीया एशिया को संकटग्रस्त एमएसवी सेलवामाथा की सहायता के लिए रवाना किया गया । भारतीय तटरक्षक पोत अभिनव को भी बचाव अभियान में लगाया गया । इसके अतिरिक्त क्षेत्र को व्यापारिक परिवहन से निर्वाध बनाने के लिए एमआरसीसी मुंबई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नेट को सक्रिय किया गया ।


19 मार्च 16 को 0315 बजे एमवी हफनीया एशिया मौके पर पहुँची । छानबीन करने पर एमएसवी सेल्वामाथा में 08 लोग दिखाई पड़े जिन्हें बाद में पोत द्वारा बचा लिया गया । भा.त.र. पोत अभिनव ने एमबी हफनीया से सपंर्क साधा तथा 19 मार्च 16 को 0630 बजे तक सभी 08 कर्मियों को सुरक्षित बचा लिया गया । 19 मार्च 16 को 0730 बजे एम बी हफनीया एशिया ने फुजैराह के लिए यात्रा पुनः प्रारंभ किया ।


भा.त.र. पोत अभिनव एवं तटरक्षक डोर्नियर के संयुक्त समुद्री एवं वायु के समन्वित अभियान द्वारा तैर रहे मलबे को खोजा गया । मौके से 03 नॉटिकल मील की दूरी पर 05 बंद डिब्बे तैरते हुए मिले । भारतीय तटरक्षक पोत ने वहाँ से प्रस्थान किया तथा 19 मार्च 16 को 2100 बजे कोच्ची पहुँची तथा सभी 08 कर्मियों को 19 मार्च 16 को 2200 बजे मरीन पोलीस फोर्ट कोच्ची को सौंप दिया गया ।

मत्स्य नौका “माधव कृष्णा”में प्लावन

19 मार्च 16 को 1900 बजे मत्स्य नौका ‘माधव कृष्णा’से वी एच एफ पर भारतीय तटरक्षक पोत अरिंजय को संकट की सूचना प्राप्त हुई । ओखा के पश्चिम 62 नॉटिकल मील की दूरी पर मत्स्य नौका के इंजन रूम में पानी घुस गया फलस्वरूप त्वरित सहायता के लिए नौका ने अनुरोध किया ।


मत्स्य नौका “माधव कृष्णा”में प्लावन

 

मत्स्य नौका माधव कृष्णा में प्लावन की सूचना प्राप्त होने के बाद भारतीय तटरक्षक पोत को मत्स्य नौका की सहायता के लिए अधिकतम गति से रवाना किया गया । भारतीय तटरक्षक पोत अरिंजय मौके पर 2045 बजे पहुँची तथा छानबीन के दौरान पता चला कि इंजन रूम में काफी पानी घुसा हुआ है । सभी 05 कर्मियों को बचाया गया तथा उन्हें पोत पर ले जाया गया । मत्स्य नौका को पास लेकर घुसे हुए पानी को निकालने का सघन प्रयास किया गया; परंतु दोपहर से ही लगातार घुस रहे पानी के कारण 19 मार्च 16 को 2205 बजे नौका डूब गई । सभी जीवित कर्मियों को बाद में भारतीय तटरक्षक पोत मीरा बेन में आगे ओखा तक पहुँचाने हेतु स्थानांतरित कर दिया गया । 20 मार्च 16 को 1500 बजे जीवित मछुआरों को सहायक निदेशक मत्स्य को सौंप दिया गया ।

एमएफवी “सप्तगिरी”की सहायता

10 फरवरी 16 को भारतीय तटरक्षक पोत विश्वस्त को नियमित निगरानी के दौरान लगभग 0720 बजे काकीनाडा लाइट के दक्षिण पूर्व 86.5 नॉटिकल मील की दूरी पर, 09 कर्मियों सहित एम एफ वी ‘सप्तगिरी’ अनियंत्रित ढंग से तैरती हुई दिखाई पड़ी । नौका गियर बॉक्स में आई खराबी के कारण अनियंत्रित हो गई थी, तथा अपने स्वामी से संपर्क नहीं कर पा रही थी । भारतीय तटरक्षक पोत विश्वस्त नौका के समीप गई । तकनीकी दल ने खराबी का पता लगाकर उसके मरम्मत का प्रयास किया परंतु गियर बॉक्स के पूरी तरह खराब होने तथा स्पेयर कल पुर्जों की अनुपलब्धता के कारण मरम्मत नहीं किया जा सका ।


नौका के मास्टर ने भारतीय तटरक्षक पोत विश्वस्त को काकीनाड़ा तक खींचकर ले चलने के लिए अनुरोध किया । 10 फरवरी 16 को 0915 बजे, 09 कर्मियों सहित खराब नौका को भारतीय तटरक्षक पोत विश्वस्त ने खींचकर ले जाने के लिए काकीनाड़ा की ओर प्रस्थान किया । 11 फरवरी 16 को 0730 बजे वकलापुडी लाइट के पूर्व, 09 नॉटिकल मील की दूरी पर खराब नौका को भारतीय तटरक्षक पोत सी-141 को सौंप दिया गया । भारतीय तटरक्षक पोत सी-141 ने खराब नौका को उसके स्वामी द्वारा प्रबंध किये गये, दूसरी नौका को सौंप दिया और इस प्रकार खराब नौका काकीनाड़ा मत्स्य बंदरगाह में सुरक्षित पहुँच गई ।

मत्स्य नौका “निक्सी मॉल”की सहायता

06 फरवरी 16 को 2200 बजे समुद्री बचाव समन्वय केंद्र मुंबई को एमआरसीसी चेन्नई से सूचना मिली कि मालवा के दक्षिण पश्चिम 07 नॉटिकल मील की दूरी पर मत्स्य नौका “निक्सी मॉल” में पानी भर गया है तथा उसे सहायता की जरूरत है । इंजन रूम में पानी भर जाने के कारण नौका आगे नहीं बढ़ पा रही थी ।


सूचना प्राप्ति के बाद भा.त.पो. सी-410 ने मत्स्य नौका निक्सी मॉल को सहायता प्रदान करने के लिए 06 फरवरी 16 को 2255 बजे गोवा से प्रस्थान किया । 07 फरवरी 16 को 0025 बजे सी-410 मौके पर पहुँची । संकटग्रस्त नौका निक्सी मॉल को चिन्हित कर पता लगाया कि 03 टैंक में 02 टैंक पानी से भरे हुए हैं । इंजन रूम विल्ज लेवल तक भरा हुआ था । पोत में उपलब्ध पंप की सहायता से टैंक को खाली न किया जा सका । समुद्र में परिस्थितियां प्रतिकूल थीं । मत्स्य नौका निक्सी मॉल के 11 कर्मियों को सी-410 पोत में चढ़ाया गया तथा 07 फरवरी 16 को 0110 बजे मोरूमूगाँव हार्बर की तरफ पोत रवाना हुई । मत्स्य नौका के साथ 07 फरवरी 16 को 0505 बजे पोत मोरूमूगाँव हार्बर में पहुँच गई । कार्मिकों सहित मत्स्य नौका को स्वामी द्वारा प्रबंध किये गये स्थानीय प्रतिनिधि को सौंप दिया गया ।

एम एफ बी ‘विरजिन मेरी’की सहायता

13 जनवरी 16 को लगभग 1550 बजे, एमआरसीसी मुंबई को एम वी ‘सिमा गिसले’से सूचना प्राप्त हुई कि लकड़ी की मत्स्य नौका ‘विरजिन मेरी’ 11 कर्मियों के साथ इंजन खराब हो जाने के कारण मुंबई के दक्षिण पश्चिम 107 नॉटिकल मील की दूरी पर अनियंत्रित ढंग से 03 दिनों से तैर रही है ।


सूचना प्राप्त होने के बाद नियमित तौर पर गश्त कर रहे डोर्नियर वायुयान ने नौका से संपर्क साधा और पता लगा कि नौका का बूस्टर पंप फेल हो गया है । और उसे सहायता की जरूरत है । वायुयान ने यह भी सूचना दी कि मैसर्स ओएनजीसी की अपतटीय सहायता पोत ने संकटग्रस्त नौका के कर्मियों को भोजन व पानी मुहैया कराया है । एमआरसीसी मुंबई ने नौका स्वामी से संपर्क करके नौका के कर्षण की व्यवस्था करने को कहा । परंतु नौका स्वामी ने 100 नॉटिकल मील नौका को कर्षण द्वारा ले जाने में अपनी असमर्थता जताई । तत्पश्चात् एमआरसीसी मुंबई ने मैसर्स ओएनजीसी से पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार मुंबई आ रही किसी अन्य ओएसवी द्वारा सौहार्दवश कर्षण करने का अनुरोध किया ।


18 जनवरी 16 को गश्त कर रही भा.त.पो. अग्रिम को नौका की सहायता के लिए मोड़ दिया गया । 18 जनवरी 16 को 2345 बजे भा.त.पो. अग्रिम मौके पर पहुँच कर नौका को कर्षण के लिए अपने अधीन ले लिया । कर्मियों के साथ नौका को मिडिल ग्राउंड मुंबई तक खींच कर लाया गया तथा 19 जनवरी 16 को 1945 बजे सुरक्षित ढंग से मत्स्य आयुक्त मुंबई को सौंप दिया गया ।

भारत बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के समीप 06 मछुआरों को बचाने का अभियान

02 जुलाई को स्क्वाड्रन को नियमित उड़ान पर जाना था । दल ने मौसम का अध्ययन करके उड़ान की योजना बनाई ।

 

 

वायुकर्मियों के प्रयासों के परिणामस्वरूप तट से लगभग 125 नॉटिकल मील दूर एवं भारत-बांग्लादेश आईएमबीएल के समीप यह मछुआरों सहित एक संकटग्रस्त भारतीय नौका दिखाई पड़ी । सूचना एकत्र करने तथा सहायता हेतु विश्वास दिलाने के लिए वायुयान ने लो-लेवल की उड़ान भरी । उपलब्ध सूचना बेस तथा जिला मुख्यालय तथा अभ्यासरत भारतीय तटरक्षक पोत राजकिरन को पहुँचाई गई । पोत को नौका की तरफ मोड़ा गया, परिणामस्वरूप 06 बहुमूल्य जानें बचाई गईं ।

भुवनेश्वर दल द्वारा 04 बहुमूल्य जीवन का बचाव

10 अगस्त 15 यूनिट को श्रीलंका की मत्स्य नौका के गायब होने की सूचना मिली । मौसम अत्यंत ही खराब था जिसमें उड़ान भरना मुश्किल कार्य था । स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वायुकर्मियों ने मिशन को अंजाम देने के लिए उड़ान भरी ।


04 बहुमूल्य जीवन की खोज एवं बचाव



कम दृश्यता के कारण वायुकर्मियों को नौका को खोजने के लिए बहुत ही लो-लेवल में देर तक उड़ान भरने के लिए मजबूर होना पड़ा । लगभग 02 घंटे के संघर्ष के पश्चात् 175 पाराद्वीप लेफ्ट 246 एनएम की पोजीशन में 04 मछुआरों वाली श्रीलंकाई नौका ‘अयेशा’ का पता चला । महत्वपूर्ण सूचना एकत्र करने तथा मछुआरों को मदद की दिलासा देने के लिए वायुयान को नौका के ऊपर बहुत ही लो-लेवल की उड़ान भरनी पड़ी । उपलब्ध सूचना भारतीय तटरक्षक पोत सागर को पहुँचाई गई । और इस प्रकार पोत ने 04 महत्वपूर्ण जीवन को बचाया ।

दुर्घटनाग्रस्त ‘पवन हंस हेलो’ की खोज एवं बचाव

04 नवंबर 15 को 1931 बजे एम आर सी सी मुंबई को पवन हंस डौफिन, ए एस 365 एन 3 हेलीकॉप्टर के संकट में होने की सूचना मिली । कॉल साइन बीटी-पी डब्ल्यू एफ था । एस बी-ए आई एस पर एम आर सी सी मुंबई ने दुर्घटना के पास की पोतों को चिन्हित किया तथा टी ए जी-VI (ओ एन जी सी पोत) से संपर्क साधा । टी ए जी-VI ने रिपोर्ट दी कि ओ एस वी समुद्र सेवक ने हेलो के कुछ मलबे को प्राप्त किया ।


दुर्घटनाग्रस्त ‘पवन हंस हेलो’

 

दुर्घटनाग्रस्त ‘पवन हंस हेलो’ की खोज एवं बचाव भारतीय तटरक्षक पोत विजित चिन्हित स्थान पर पहुँचकर ओ एस सी की जिम्मेदारियों को संभाला । सी जी डी ओ ने हवाई निरीक्षण किया तथा 05 नारंगी रंग के मलबे एवं 03 सफेद रंग के मलबे को दिखाई देने की सूचना भारतीय तटरक्षक पोत अचूक को दी । इसी दौरान आई सी जी एस विजित ने अपना अभियान प्रारंभ किया । फलस्वरूप तैरते हुए मलबे के दिखाई देने की सूचना दी ।

 

1900 बजे पानी के अंदर से ओ एस वी समुद्र सेवक के रिसीवर से ई एल टी ट्रांसमिशन प्राप्त हुआ जिसकी पोजीसन 19 डिग्री 21.65 उत्तर, 071 डिग्री 19.6 पूर्व थी ।


दुर्घटनाग्रस्त ‘पवन हंस हेलो’


दुर्घटनाग्रस्त ‘पवन हंस हेलो’ की खोज एवं बचाव 09 नवंबर को 1219 बजे फुग्रो मैपर ने 19 डिग्री 16.52 उत्तर, 071 डिग्री 27.52 पूर्व पोजीसन पर 8.5mx2.5mx1.2m आकार का मलबा होने की सूचना दी । पी एस वी समुद्र सेवक द्वारा गोता लगाये जाने के बाद आस-पास के क्षेत्र में हेलीकॉप्टर के मलबे को देखा गया । 09 नवंबर 1815 बजे ओ एस बी समुद्र सेवक ने पाइलेट कैप्टन टी के गुहा के शरीर सहित कॉकपिट का निस्तारण करते हुए और मलबों के साथ बाहर निकाला । उच्चस्तरीय समिति द्वारा विश्लेषित एवं चिन्हित स्थानों के समीप से मलबा मिला । खोज एवं बचाव अभियान 12 नवंबर 15 तक जारी रहा । आई सी जी एस अचूक, INDO सी जी डी ओ, आई सी जी एस चेतक, आई एन आई एस वी, एम एस वी हल अनंत एवं समुद्र सेवक ने समन्वित रूप से समुद्री एवं हवाई सर्वे किया ।

नेल्लौर जिला (आंध्रप्रदेश) में संकटग्रस्त परिवारजनों का बचाव

17 नवंबर की सुबह कृष्णापत्तनम की स्थानीय पुलिस ने भारतीय तटरक्षक स्टेशन कृष्णापत्तनम को नेल्लौर जिला स्थित मुथुकर मंडल के राजुगंटा एक्वा फॉर्म पोलम में रह रहे परिवारजनों के संकट में होने की सूचना दी । दक्षिणी आंध्रप्रदेश में 72 घंटे लगातार हुई भयंकर बारिश ने इलाके को बाढ़ के आगोश में ले लिया फलस्वरूप इस इलाके में रह रहे परिवार मुख्य गांव से अलग-थलग पड़ गये ।


नेल्लौर (आंध्रप्रदेश) में संकटग्रस्त परिवारों का बचाव अभियान


भारतीय तटरक्षक स्टेशन कृष्णापत्तनम ने भारतीय तटरक्षक पोत सी-417 के 03 कर्मीदल एवं जेमिनी को सड़क मार्ग से मुथुकर मंडल को रवाना किया । दल के वहाँ पहुँचने पर स्थानीय पुलिस एवं राजस्व विभाग के कार्मिकों ने बताया कि 72 घंटों से हो रही लगातार वर्षा से इलाके में बाढ़ आ गई है जिसके कारण 09 महिलाएं एवं 03 बच्चे सहित 13 लोग बुरी तरह फंस गये हैं । जेमिनी एवं लाइफ जैकेट का प्रयोग करते हुए तथा स्थानीय पुलिस की सहायता से भारतीय तटरक्षक बचाव दल ने मुसीबत में फंसे हुए 13 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया ।

 


नेल्लौर(आंध्रप्रदेश) में संकटग्रस्त परिवारों का बचाव अभियान

 

मत्स्य नौका ‘प्रियंका’ की सहायता

12 दिसंबर 15 को लगभग 1000 बजे भारतीय तटरक्षक मुख्यालय संख्या-13 पुडुचेरी को नौका मालिक मि. गुणाशेखरन से टेलीफोन द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि उनकी मत्स्य नौका प्रियंका का गियर टूट गया है और इंजन कक्ष में पानी भर गया है । उन्होंने सहायता के लिए अपील की ।


 


सूचना मिलने पर, पुडुचेरी से 12 दिसंबर 15 को 1100 बजे आई सी जी एस आई सी-120 को नियोजित किया गया जो गियर ऑयल तथा पंप के साथ सहायता के लिए 12 दिसंबर 15 को 1240 बजे पहुँची । आई सी जी एस आई सी-120 के तकनीकी टीम मत्स्य नौका पर पहुँचकर पंप द्वारा भरे हुए पानी को निकाला । तत्पश्चात् मालिक द्वारा व्यवस्था की गई दूसरी नौका के द्वारा खींचकर 12 दिंसबर 15 को 1700 बजे थेंगैथिटू बंदरगाह पहुँचाई गई ।

संकटग्रस्त मत्स्य नौका ‘श्री मास्टर’

30 अगस्त 15 को भारतीय तटरक्षक स्टेशन (कारवार) को तटीय पुलिस स्टेशन (सी पी एस) उडीपी कर्नाटक से सूचना मिली कि देवेगुड्डा एलटी से दक्षिण-पश्चिम 27 नॉटिकल मील की दूरी पर 10 कर्मियों के साथ एक मत्स्य नौका इंजन में खराबी आ जाने के कारण अनियंत्रित रूप से तैर रही है ।



संकटग्रस्त नौका श्री मास्टर की खोज एवं बचाव

 

सूचना मिलने पर, 30 अगस्त 15 को 1500 बजे अनियंत्रित रूप से तैरती मत्स्य नौका की खोज के लिए आई सी जी एस सी-420 को लगाया गया । आगे 30 अगस्त 15 को 2205 बजे नियमित रूप से गश्त कर रही भारतीय तटरक्षक पोत अमर्त्य को चिन्हित स्थान की ओर रवाना किया गया । 31 अगस्त 15 को लगभग 0200 बजे तड्री लेफ्ट के दक्षिण पश्चिम 22 नॉटिकल मील की दूरी पर अनियंत्रित तैरती मत्स्य नौका दिखाई पड़ी । नौका के मास्टर ने बताया इंजन में खराबी आ जाने के कारण ये नौका 28 अगस्त 15 से ऐसे ही तैर रही है । तथा इसकी सूचना नौका के मालिक को दे दी गई है तथा उनसे सहायता के लिए दूसरी नौका की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है । सभी कर्मी स्वस्थ पाये गये । तथा नौका में पर्याप्त रसद मौजूद थी । भारतीय तटरक्षक पोत अमर्त्य की बोर्डिंग पार्टी के कर्मियों ने खराबी ठीक करने का प्रयास किया परंतु इंजन ठीक न हो सका । नौका के मालिक ने एक स्थानीय नौका दरिया दौलत को खींचने में सहायता करने के लिए इंतजाम किया । भारतीय तटरक्षक पोत अमर्त्य क्षेत्र में डटी रही । 10 कर्मियों के साथ नौका को भटकल बंदरगाह तक दरिया दौलत नौका से सुरक्षित खींच कर लाया गया । नौका 31 अगस्त 15 को 2015 बजे सुरक्षित पहुँच गई ।

मंगला मा मत्स्य नौका की सहायता

19 सितंबर 14 को लगभग 1255 बजे पाराद्वीप ट्रालर एसोसिएसन के उपाध्यक्ष ने जिला मुख्यालय-7 को टेलीफोन करके सूचित किया कि देवी मुहाने के दक्षिण पूर्व 10-12 नॉटिकल मील की दूरी पर प्रोपेलर में मत्स्य जाल के फंसने तथा पॉवर सप्लाई की अनुपस्थिति के कारण कर्मियों के साथ भारतीय नौका संकट में फंस गई है ।


 

मत्स्य नौका मंगला मा की सहायता सूचना प्राप्ति पर गश्त कर रही भारतीय तटरक्षक पोत ‘सरोजिनी नायडू’ को सहायता करने के लिए निर्देश दिया गया । 19 सितंबर 14 को लगभग 1645 बजे भारतीय तटरक्षक पोत सरोजिनी नायडू ने संकटग्रस्त नौका को चिन्हित किया तथा उसे खीचने के लिए नियंत्रण में लिया । इस प्रकार 08 कर्मियों युक्त मत्स्य नौका पाराद्वीप तक लाई गई तथा 20 सितंबर 14 को 0935 बजे पाराद्वीप से उत्तर-पूर्व लगभग 4.5 नॉटिकल मील की पोजीशन पर मत्स्य विभाग द्वारा व्यवस्थित “सत्य साई” नौका को, नेहरू बंगलो मत्स्य बंदरगाह पाराद्वीप तक ले जाने के लिए सौंपा गया ।

मत्स्य नौका जै जलाराम की सहायता

25 दिसंबर 14 को लगभग 0450 बजे भारतीय तटरक्षक पोत सावित्रीबाई फूले को एमएमबी चैनल 16 पर 05 कर्मियों युक्त मत्स्य नौका जै जलाराम से संकट में होने की सूचना प्राप्त हुई कि मीठा बंदरगाह के दक्षिण-पश्चिम से 63 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित नौका के इंजन रूम में पानी भर गया है ।


 


मत्स्य नौका जै जलाराम की सहायता सूचना मिलने पर, 25 दिसंबर 14 को 0640 बजे भारतीय तटरक्षक पोत सावित्रीबाई फूले घटना स्थल पर पहुँची तथा डैमेज कंट्रोल पार्टी को मत्स्य नौका जै जलाराम की तरफ रवाना किया । पार्टी ने पता लगाया कि इंजन रूम में पानी वाटर लाइन में लकड़ी के प्लैंक के आने के कारण आया था । डैमेज कंट्रोल पार्टी ने इकट्ठे हुए पानी को निकालने के पश्चात् ओखा की खींचना शुरूकिया तथा भारतीय तटरक्षक अंतर्रोधी नौका (आईबी) आईसीजीएस-411 की उपस्थिति में नौका स्वामी द्वारा व्यवस्थित दूसरी नौका को सौंप दिया । तत्पश्चात् आईसीजीएस सी-411 की सुरक्षा में 25 दिसंबर 14 को 1940 बजे मत्स्य नौका ओखा में सुरक्षित पहुँच गई ।

धाऊ की खोज एवं बचाव सहायता ‘एम एस वी सरोजिनी’



‘एम एस वी सरोजिनी’ खोज एवं बचाव सहायता

 

 25 दिसंबर 15 को लगभग 1845 पर वी एच एफ चैनल 16 पर एम एस बी सरोजिनी से भारतीय तटरक्षक पोत सम्राट को संकट की सूचना मिली । पोत ने सूचित किया कि हल (HULL) में दरार हो जाने के कारण पानी भर गया तथा अनियंत्रित ढंग से मुरुद के पश्चिम में 12.5 नॉटिकल मील की दूरी की पोजीशन पर तैर रहा है । पानी भर जाने के कारण धाऊ का इंजन बंद हो गया और अनियंत्रित ढंग से वह तैरने लगा । भारतीय तटरक्षक पोत सम्राट ने तुरंत अपनी दिशा बदली और धाऊ की ओर प्रस्थान किया । पोत सम्राट को धाऊ से 14 नॉटिकल मील की दूरी पर ‘एम टी हार्श प्रेम’ दिखाई पड़ा । धाऊ की अंतरिम सहायता के लिए तुरंत उसे उस तरफ जाने का अनुरोध किया । 2045 बजे एम टी हार्श चिन्हित स्थान पर पहुँचा तथा एम एस वी सरोजिनी से संपर्क साधा । परंतु कम गहराई के कारण धाऊ तक न पहुँच सका । भारतीय तटरक्षक पोत 2100 बजे उस स्थान पर पहुँचा तथा एम एस वी सरोजिनी के कर्मियों के लिए सुरक्षित नौका रवाना की । एम आर सी सी मुंबई ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नेट (ISN) सक्रिय किया बाद में नाविकों के लिए नेवेरिया चेतावनी निर्गत की गई । 25 दिसंबर 15 को लगभग 2200 बजे भारतीय तटरक्षक पोत सम्राट द्वारा एम एस वी सरोजिनी के सभी 8 कर्मियों को बचाया तथा जहाज पर चढ़ाकर भारतीय तटक्षक पोत सुभद्रा कुमारी चौहान को सौंप दिया । भारतीय तटरक्षक पोत सुभद्रा कुमारी चौहान से कर्मियों को लेने के लिए भारतीय तटरक्षक पोत सी-402 0615 बजे मुंबई से नौचालन प्रारंभ किया । 26 दिसंबर 15 को 1400 बजे भारतीय तटरक्षक पोत सी-402 मुंबई बंदरगाह पहुँची तथा सभी 8 कर्मियों को स्थानीय पुलिस स्टेशन येलो गेट, मुंबई में सुरक्षित पहुँचा दिया ।

‘वेस्टफॉन पोत’ के इंजन कक्ष में आग की सूचना


 

31 मई 15 को लगभग 1420 बजे पश्चिमी मुंबई हाई (ओ डी ए) से 10 नॉटिकल मील दूर स्थित आपूर्ति पोत वेस्टफॉन से वी एच एफ पर संकट की सूचना मिली । पोत से संपर्क करने पर पता चला कि इंजन रुम में आग लग गई है, और वो फैल रही है । जहाज पर किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी । भारतीय तटरक्षक डोर्नियर 781 ने वी एच एफ चैनल-16 की सहायता खोज एवं बचाव के कार्यों को समन्वित किया । तथा पास की आपूर्ति पोतों ओसियन डायमंड, बीएस नेगी, ग्रेटशिप अहिल्या को सहायतार्थ रवाना होने के लिए अनुरोध किया । निगरानीरत भारतीय तटरक्षक पोत अचूक को तुरंत सहायता के लिए रवाना किया गया ।

 

 

भारतीय तटरक्षक पोत बाउंड्री कूलिंग करती हुई


31 मई 15 को 1518 बजे दो अपतटीय आपूर्ति पोत बी एस नेगी एवं ओसियन डायमंड चिन्हित स्थान पर पहुँची । ओसियन डायमंड पोत बाउंड्री कूलिंग करने लगी तथा बी एस नेगी ने संकटग्रस्त पोत से कर्मियों को निकालना प्रारंभ किया । इसी बीच सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय तटरक्षक पोत संकल्प एवं समुद्र प्रहरी मुंबई से रवाना हुई । खोज एवं बचाव के प्रयासों को सफल करने के लिए भारतीय तटरक्षक डोर्नियर ने अभियान के लिए उड़ान भरी । दूसरे भारतीय तटरक्षक डोर्नियर ने भी खोज एवं बचाव सहायतार्थ दमन से उड़ान भरी । दुर्घटना क्षेत्र को दूसरे क्षेत्रों से अलग रखने तथा अग्निशमन यंत्रों को सहायतार्थ चेतावनी प्रदान करने के लिए एमआरसीसी मुंबई ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नेट निर्गत किया ।


लगभग 1720 बजे अपतटीय आपूर्ति पोत ओसियन डायमंड ने सूचना दी कि अग्निशामक CO2 प्रणाली का प्रयोग करके कक्ष की आग को नियंत्रण में कर लिया गया है । बाउंड्री कूलिंग का कार्य साथ में चलता रहा । सभी 33 कर्मी सुरक्षित पाये गये जिसमें 28 को बाहर निकाल लिया गया जबकि 05 संकटग्रस्त पोत कार्यरत रह गये । 31 मई 15 को संकटग्रस्त पोत को अपतटीय आपूर्ति पोत मालवीय-24 से खींचने के लिए 280 prongs Lt 102 नॉटिकल मील की स्थिति से जोड़ा गया तथा खींचना शुरू किया । 01 जून 15 को 1700 बजे अपतटीय आपूर्ति पोत वेस्टफोन सुरक्षित ब्रेवो एंकरेज मुंबई पहुँच गई ।

खोज एवं बचाव संबंधी हाल की घटनाएं

मत्स्य नौका “एम वी पौमी”की सहायता


मंडपम से दूर असमर्थ बल्लम “वेनिता”की सहायता


मत्स्य नौका “महेज”की रत्नागिरी में सहायता


डूबती एम एस वी “सेलवामाथा”की सहायता


मत्स्य नौका “माधव कृष्णा”में प्लावन


एमएफवी “सप्तगिरी”की सहायता


मत्स्य नौका “निक्सी मॉल”की सहायता


एम एफ बी ‘विरजिन मेरी’की सहायता


जय जलाराम की सहायता


खोज एवं बचाव सहायता 'एमएसवी सरोजिनी'


एफबी प्रियंका की सहायता


नेल्लोर जिला (आंध्रप्रदेश) में संकटग्रस्त परिवारों की खोज एवं बचाव


दुर्घटनाग्रस्त पवनहंस हेलो की खोज एवं बचाव


मंगला मां की सहायता


संकटग्रस्त मत्स्य नौका ‘श्री मास्टर’


भुवनेश्वर दल द्वारा 04 बहुमूल्य जानें बचाई गईं


भारत-बंग्लादेश के समीप 06 मछुआरों को बचाने का अभियान



वेस्टफोन पोत के इंजन रूम में आग की सूचना पर सहायता


 

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Last Updated On :

12/06/2016
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अंतिम नवीनीकृत: 25/09/2017

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